Posts

Showing posts from January, 2007

थक गया हूँ बहुत...आज सोता हूँ मैं

आज मुझे सो लेने दो,
दिन भर का थका हुआ हूँ;
नींद में ही सही रो लेने दो।।

जब उसका कोई सहारा ना था,
वो किसी का भी इतना दुलारा ना था;
तब सहारा दिया था उसे एक दिन।।

उसके आँसू गिरे जब भी, रोया हूँ मैं,
उसकी हर आह पर एक आवाज की;
उसको जीने की हर पल नसीहत भी दी।।

आज खुश है वही और रोता हूँ मैं,
उसको चिन्ता नहीं एक पल के लिये;
अपने आँसू से पत्थर भिगोता हूँ मैं।।

गम की दुनिया में गम के ही साये मिले,
दोसत जितने भी ढूँढे पराये मिले,
एक मुद्दत से हूँ राह पर मैं खड़ा;
लोग जितने भी देखे,सताये मिले।।

गम नहीं रीत है ये ही संसार की,
क्षुद्रता है यही स्वार्थ व्यापार की,
किन्तु फिर भी तिमिर को सँजोता हूँ मैं;
थक गया हूँ बहुत,आज सोता हूँ मैं।।